मूर्ख बातूनी कछुआ- पंचतंत्र की कहानियां
मूर्ख
बातूनी कछुआ- पंचतंत्र की कहानियां
उसकी बात सुनकर हंसों ने कहा कि वह तो ठीक है पर उड़ान के दौरान उसे
अपना मुंह बंद रखना होगा। कछुए ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह किसी भी हालत में
अपना मुंह नहीं खोलेगा। कछुए ने लकड़ी के टुकड़े को अपने दांत से पकड़ा फिर दोनो हंस
उसे लेकर उड़ चले। रास्ते में नगर के लोगों ने जब देखा कि एक कछुआ आकाश में उड़ा जा
रहा है तो वे आश्चर्य से चिल्लाने लगे।
लोगों को अपनी तरफ चिल्लाते हुए देखकर कछुए से रहा नहीं गया। वह
अपना वादा भूल गया। उसने जैसे ही कुछ कहने के लिए अपना मुंह खोला कि आकाश से गिर
पड़ा। ऊंचाई बहुत ज्यादा होने के कारण वह चोट झेल नहीं पाया और अपना दम तोड़ दिया।
सीख : बुद्धिमान भी अगर अपनी चंचलता पर काबू नहीं रख पाता है तो
परिणाम बुरा होना निश्चित है ।

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